प्‍यार की मनाहियां और कुछ चोर दरवाजे

बेदखल की डायरी कल विनीत के ब्‍लॉग पर एक पोस्‍ट और दियाबरनी से प् यार हो जाता ‍और मेरे बचपन की कुछ तसवीरें अचानक याद हो आईं, जो कहीं अवचेतन में पड़ी होंगी और जिदंगी पर अपना असर छोड़ गई होंगी पर अब जो दिन-रात हथौड़े सी दिमाग में दनदनाती नहीं रहती। कुल मिलाकर इलाहाबाद... [पूरी पोस्ट]
writer मनीषा पांडे
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[18 Oct 2009 11:58 AM]

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