गीत कौन सा मैं गाऊँ ?

गीत सुनहरे जग ये जैसे रो रहा है मातम घर घर हो रहा है . गीत कौन सा मैं गाऊँ ? कैसे दुनिया को बहलाऊँ ? देने सुत को एक निवाला बिक जाती राहों में बाला . कौन धान की हांडी लाऊँ ? भर भर पेट उन्हें खिलाऊँ ? खेल अनय का हो रहा है न्याय चक्षु बंद सो रहा है . कौन प्रभाती र... [पूरी पोस्ट]
writer Kavi Kulwant
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[18 Oct 2009 11:49 AM]

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