टूट पायेंगे नहीं पत्थर ज़रा सी चोट से .........( गीत )

अनुरक्ति टूट पायेंगे नहीं पत्थर ज़रा सी चोट से ! ये उड़ाने ही पड़ेंगे भूमिगत विस्फोट से !! जो ' विचारों ' का मसीहा था 'बिचारा ' हो गया है ! जिसको होना था भँवर ,वो ही किनारा हो गया है ! हम धरा को कोसते हैं, अंकुरण देती नहीं , क्यों नहीं कहते कि ये बादल नकारा हो... [पूरी पोस्ट]
writer ललितमोहन त्रिवेदी

गीत ...देशभक्ति

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[18 Oct 2009 10:54 AM]

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