अरे कोई इन ढाबों से बचाओ...

अर्ज़ है... ईद ख़त्म हो चुकी थी और अब घर से दिल्ली रवानगी का वक्त करीब आ रहा था। अम्मी ने बैग में करीब-करीब सारा सामान बांध दिया था। कपड़ों और किताबों के अलावा खाने का भी कुछ सामान बैग में था। फिर वो सुबह भी आई जब दिल्ली जाने का वक्त आया। घर से निकलते वक्त तमाम... [पूरी पोस्ट]
writer अबयज़ ख़ान
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[18 Oct 2009 06:43 AM]

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