फिर रंग दे बसंती...
चित्र - google के सौजन्य से.) अत्याचार बढा था हमपर, बना था बोझ अंग्रेजी शाषण, अपने ही घर में अपमानित, हमने कहा था रंग दे बसंती... साठ साल अपना राज, पिछड़े के पिछड़े हैं रहे हम, भरता जा रहा स्विस बैंक, अब न कहें क्यों, रंग दे बसंती... गाँधी की खादी को...
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अम्बरीश अम्बुज
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[18 Oct 2009 06:11 AM]



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