शत-शत दीप जलाएँ

सहज साहित्य(SAHAJ SAHITYA) रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' अँधियारे के सीने पर हम शत-शत दीप जलाएँ ; दिल में दर्द बहुत है माना, फिर भी कुछ तो गाएँ । दुख की नदी बहुत है लम्बी बहुत ही छोटी नैया , छप-छप करती तिरती जाती पार पहुँचती भैया ! दूर किनारा ,गहरी धारा देख नहीं घबराएँ । आँसू और... [पूरी पोस्ट]
writer सहज साहित्य
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[18 Oct 2009 05:26 AM]

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