.....अवसाद के बीच
दीपावली गुजर गई...रात भर पटाखों के शोर के बीच दिनभर की थकान ने आँखों में नींद भर दी...और सुबह उठे तो उत्सव गुजर चुका था और गुजर चुका था उसका उत्साह.... अब थी छुट्टी....खाली बर्तन-सी बजती हुई....कोई योजना नहीं और कोई तैयारी नहीं....फूटे हुए पटाखों के...
[पूरी पोस्ट]
डॉ. अमिता नीरव
19
4
0
4
5
[18 Oct 2009 04:17 AM]



Shuffle








