दुःख की शुरुआत

अक्षरछाया मुझे वहीं जाना होगा जहाँ मैंने अपनों को छोड़ा था उनके दुःख से अपने को अलग कर लिया था। अब जिन्हें अपना समझा था वे भी जा रहे हैं सुख की जिंदगी जीने मुझे छोड़कर मानो अपने सुख मुझसे दूर रहकर ही पा सकते हों। मैं कुछ नहीं कह पाता क्योंकि,ये रास्ते मैने ही त... [पूरी पोस्ट]
writer Narendra Kumar
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[18 Oct 2009 00:34 AM]

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