दीपक

भोर सृजन संवाद एक) मिट्टी धरती से कपास खेतों से तेल श्रमिकों से और आग सूर्य से लिया उधार मनुष्यों ने बनाया दीपक जिसके जलते ही घोर अंधकार में भी जगमगाने लगी पृथ्वी लो हो गयी दिवाली। (दो) न जाने कौन सी धुन है जो जलाए रखती है इसको जलता रहता है अंधेरे के खिलाफ अंधेरा ज... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मिश्र

दिवाली

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[17 Oct 2009 15:24 PM]

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