एक दीया, मेरे दोस्त तुम भी जलाना.....
अमावस की रात , जब अँधेरी हो जाती है , स्याह - सा लगता है , यह सारा जमाना , तवे पर जब कभी कालिख जम जाये , मुश्किल होता है तब उसको मिटाना , एक दीपशिखा जो युगों तक जलती है , अनवरत संसार के हर तम् हरती है , हर बार दीयों की कोशिश यही होती है , मिलकर संसार...
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Navnit Nirav
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[17 Oct 2009 03:49 AM]



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