जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना...

आशियाना स‌च कहूं तो त्योहारों को लेकर मैं कोई खास उत्साहित नहीं रहता। त्योहार वाला दिन मेरे लिए आम दिनों जैसा ही होता है। घर पर टीवी देखना या इंटरनेट पर वक्त बिताना ज्यादा अच्छा लगता है। पूजा-पाठ, पटाखों का शोर और बाजार स‌े ढेर स‌ारा स‌ामान जुटाने का झंझट, प... [पूरी पोस्ट]
writer रवीन्द्र रंजन
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[17 Oct 2009 03:32 AM]

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