आ गई दिवाली !

नया घर चेहरे पर मुस्कराहट चिपकी,मन अंदर से खाली-खाली चारों ओर घुप्प-अंधेरा ,वो कहते आ गयी दिवाली कहां गये वो खील-बतासे,कहां गये वो खेल-तमाशे? कमर-तोड मंहगाई ने,कर दी सबकी हालत माली कहने को साथ-साथ हॆं,हो जाती हर रात बात हॆ फिर भी क्यों लगता हॆ? सब कुछ हॆ जा... [पूरी पोस्ट]
writer विनोद पाराशर
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[17 Oct 2009 01:55 AM]

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