दीवाली में आई याद
बरसों, कि याद नहीं कब था दीवाली में अपने घर पे। शायद 12 साल पहले घर पर अपने लोगों के साथ दीप जलाया था। कुछ-कुछ याद है लेकिन तंदरूस्त याद नहीं.. पटाखों की आवाज यहां भी सुनता हूं लेकिन अपने शहर की मिरचया पटाखे की तरह नहीं। बमों, फूलझड़ियों से मोहल्ले क...
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गिरीन्द्र नाथ झा
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[16 Oct 2009 23:59 PM]



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