दीवाली
दिया रोशनी खील बताशा फ़सलों से महका परिवेश नहीं पटाखे आतिशबाजी दीवाली का यह संदेश। दीपों के इस नव प्रकाश में नए विश्व की करो कल्पना हरी भरी होवे यह धरती सात रंगों की लगे अल्पना। नई तरंगें नई उमंगें नव आशा नूतन संकल्प खोजेंगे हम नई दिशायें नये सृजन के...
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creativekona
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[16 Oct 2009 15:36 PM]



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