दीपक रे ! जलते रहना
आनंद अनल एक बार फिर आ गयी दिवाली चमकती हुई , उजाला बिखेरती हुई। दिवाली उत्सव की प्रतीक है , तो जीवन में स्वच्छता , शुचिता , पवित्रता का संदेशवाहक भी। संदेश ग्रहण करना और बात है , मगर उत्सव मनाना हमारी संस्कृति है। युगों से हम अपनी संस्कृति , सभ्यता क...
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सुनील मंथन शर्मा
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[16 Oct 2009 09:32 AM]



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