मैं दीप बाँटती हूँ.....

shabdsudha मैं दीप बाँटती हूँ..... इनमें तेल है मुहब्बत का बाती है प्यार की और लौ है प्रेम की रौशन करती है जो हर अंधियारे हृदय औ' मस्तिष्क को. मैं दीप लेती भी हूँ... पुराने टूटे- फूटे नफरत, इर्ष्या, द्वेष के दीप, जिनमें तेल है- कलह- क्लेश का बाती है वैर -विरोध... [पूरी पोस्ट]
writer Shabdsudha
views
29
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
10
[16 Oct 2009 09:01 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix