मैं दीप बाँटती हूँ.....
मैं दीप बाँटती हूँ..... इनमें तेल है मुहब्बत का बाती है प्यार की और लौ है प्रेम की रौशन करती है जो हर अंधियारे हृदय औ' मस्तिष्क को. मैं दीप लेती भी हूँ... पुराने टूटे- फूटे नफरत, इर्ष्या, द्वेष के दीप, जिनमें तेल है- कलह- क्लेश का बाती है वैर -विरोध...
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Shabdsudha
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[16 Oct 2009 09:01 AM]



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