तोहफा-ए-दीवाली
आज सुबह सुबह अपनेराम के पड़ौसी ठाकुर गुलफामसिंह अचानक दरवाजे पर नमुदार हुए। सोचा दीवाली की रामराम करने आए विहोंगे। पर इतनी सुबह । ठाकुर साहब देर रात तक शीशे के गिलासों से खेलते हैं और सुबह दस साढ़े दस तक बिस्तर नहीं छूटता उनसे। आज सुबी सात बजे अपने...
[पूरी पोस्ट]
डॉ. कमलकांत बुधकर
23
0
0
0
1
[16 Oct 2009 07:10 AM]



Shuffle








