रसोईघर है जीवन दर्शन की प्रयोगशाला
पिछले दिनों मैं मुंबई गया तो वहां मुझे अपनी भतीजी मिली। वह इंजीनियरिंग कर रही है। मैंने उसे चाय बनाकर लाने को कहा। वह बोली, चाय बनाना तो मैं नहीं जानती। मैं आश्चर्यचकित रह गया। जो चाय बनाना न जानता हो, उससे भोजन के संबंध में बात करना ही व्यर्थ है। आज...
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सत्यनारायण भटनागर
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[16 Oct 2009 06:42 AM]



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