पुनर्वालोकन
मेरा जीना जीना है" मीरा ने तो किया था एक बार विषपान मुझे बार-बार करना है गुज़री थी एक बार अग्निपरीक्षा से सीता मुझे बार-बार जलना है जितना विष पिलाओगे तुम मुझे होगा नुकीला उतना ही मेरा दंश पिलाओगे आग जितनी मुझे उगलेगी कलम उतनी ही बन दबंग चाहो तो कर डाल...
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©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah)
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[16 Oct 2009 02:22 AM]



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