एक पहल.......दीपावली पर्व पर ....!

अक्षरशः आईये ! आगे आयेंउनके लिये भी । जो नहीं याद करना चाहते । किसी भी ऐसे त्योहार को जो रख दे उनकी दुखती रग पर हांथ । जहां दो वक्त की रोटी भी आसानी से नसीब नहीं होती । ये कर्मकाण्ड, त्योहार, धार्मिक बातें केवल दूसरों से सुनने के लिये होती हैं । अपनाने के लि... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त कुमार
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[15 Oct 2009 23:12 PM]

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