याद करते तुम्हें

जो देखा भूलने से पहले कितने दिन बाद मिले यही याद है बीते कितने दिन इस बीच बेलें फैली सूखी दीवारों पर बारिश में बह गईँ छोड़ कर निशान तस्वीरें भी पुरानी हो गईं एकतरफा पहचानते पहचानते पर सपनों में तुम हमेशा मिली बीते वहाँ कई दिन रोशनी और अँधेरा खुशी की सलवटें तुम्हारी आवाज व... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
views
24
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[15 Oct 2009 19:12 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix