याद करते तुम्हें
कितने दिन बाद मिले यही याद है बीते कितने दिन इस बीच बेलें फैली सूखी दीवारों पर बारिश में बह गईँ छोड़ कर निशान तस्वीरें भी पुरानी हो गईं एकतरफा पहचानते पहचानते पर सपनों में तुम हमेशा मिली बीते वहाँ कई दिन रोशनी और अँधेरा खुशी की सलवटें तुम्हारी आवाज व...
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मोहन राणा - Mohan Rana
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[15 Oct 2009 19:12 PM]



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