शब्द जो कविता न बन सके
१ उनका सोने का दिल है और भावों में समन्दर बसता है. ये चट्टानी सीने वाले है पर बहुत मासूम अनेक बातों में. वो पिघले फौलादो से हिला देते है मगरूर चोटियों को, उनकी वर्दी को कर सलाम पाखी, वतन महफूज है नेक हाथों में. (बहुत पहले गौतम भाई की एक पोस्ट पर किया...
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प्रकाश पाखी
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[15 Oct 2009 14:32 PM]



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