एक ये भी दीवाली है...

अमिताभ फटे कपडे वाला पसीने से लथपथ बदहवास कहां दौडा जा रहा है, रुक... अबे रुक जा...। बच के कहां जायेगा बे बोल...क्यों भाग रहा है और ये तेरे हाथ में.... क्या है, बता.... चोर कहीं के। पकडे रखना मुंडेर पर चढा था ये वो तो अच्छा हुआ कि दीये जल रहे थे दिख गया...।... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव
views
19
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
20
[15 Oct 2009 14:21 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix