इस बार दिवाली सूनी सी है,

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर इस बार दिवाली सूनी सी है, दिल की उदासी दूनी सी है. बेटा है परदेस में बैठा, माँ-बाप की आँख में धूली सी है. कितने दीप जले आँगन में, पर अँधेरा फैला था मन में. इकबार अगर तू आ जाता, हलचल सी हो जाती तन में. देखो-देखो तो ये बाती, बुझी-बुझी सी लगती है, कितनी... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
views
17
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
5
[15 Oct 2009 14:20 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix