इस बार दिवाली सूनी सी है,
इस बार दिवाली सूनी सी है, दिल की उदासी दूनी सी है. बेटा है परदेस में बैठा, माँ-बाप की आँख में धूली सी है. कितने दीप जले आँगन में, पर अँधेरा फैला था मन में. इकबार अगर तू आ जाता, हलचल सी हो जाती तन में. देखो-देखो तो ये बाती, बुझी-बुझी सी लगती है, कितनी...
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नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[15 Oct 2009 14:20 PM]



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