पागल दिल था

लम्हें जिन्दगी के कल तुम गुजर रहे थे , या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था …. कल आहट थी कोई पहचानी , या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था …. कल चाँद था फलक पर , या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था …. मैने बहुत रोका मगर , वो ना था ना नज़र आरहा था …. पागल दिल था श... [पूरी पोस्ट]
writer hemjyotsana "Deep"

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[15 Oct 2009 14:15 PM]

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