टिमटिमाता एक दीपक
टिमटिमाता एक दीपक खूब ताक़तवर हुआ यह समर तो सिर्फ़ उसके ही भरोसे सर हुआ इक समंदर के मुकाबिल मानता हूँ मैं उसे ओस की वह बूँद जिससे हलक़ मेरा तर हुआ मैं अचंभित तू अचंभित हैं अचंभित लोग सब कौन समझाये किसे ये क्या हुआ क्योंकर हुआ रास्ता उम्मीद का दिखला ग...
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jogeshwar garg
ghazal
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[15 Oct 2009 13:41 PM]



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