पागल दिल था
कल तुम गुजर रहे थे ,
या कोई ग़ज़ल गुनगुना रहा था ….
कल आहट थी कोई पहचानी ,
या कोई दरवाजे पर आ आ के जा रा था ….
कल चाँद था फलक पर ,
या तेरा चेहरा मुस्कुरा रहा था ….
मैने बहुत रोका मगर ,
वो ना था ना नज़र आरहा था ….
पागल दिल था श...
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hemjyotsana "Deep"
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[15 Oct 2009 13:39 PM]



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