दीया, तुम जलना..
दीवाली पर अभी तुरत लिखी एक छोटी कविता. जो जीवन देकर उजाला देता है, उससे की मैंने विनती. ... दीया, तुम जलना.. अंतरतम का मालिन्य मिटाना विद्युत-स्फूर्त ले आना. दीया, तुम जलना. जलना तुम मंदिर-मंदिर हर गांव नगर में जलना&n...
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श्रीश पाठक 'प्रखर'
आँगन
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[15 Oct 2009 11:55 AM]



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