अगली सुबह
दीपावली के अवसर पर एक बार यह कहानी फिर अगली सुबह मेरे घर की चहारदीवारी कुछ नीची है। इसीलिए सड़क में आने-जाने वालों को मैं आसानी से देख लेता हूँ । इस चलती सड़क पर न जाने कितने अपरिचित होते हुए भी जाने पहचाने से हो जाते है। उन्ही में से एक वह लड़का भी...
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Hem Chandra Joshi
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[15 Oct 2009 09:21 AM]



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