जब भी प्यार से कोई कहता है...

दिल ये छोटा सा, छोटी सी आशा.... चाँद-तारों को छूने की आशा.... कुश अंकल ने मेरे लिए एक नज़्म लिखी है. वो मैं आप सबसे शेयर करना चाहती हूँ. .         तारो की पोटली खुलकर गिरी कही.. जब मिली तो एक तारा कम था मद्धम रोशनी में ज़मीन पर देखा तो एक नन्ही मुस्कुराहट उंगली थाम के चली आई आँगन में.. खिलखिल... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• लविज़ा | Laviza ●๋•
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[19 Jul 2009 07:36 AM]

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