कोई बात नहीं मम्मा, ऐसे ही तो सीखूंगी

दिल ये छोटा सा, छोटी सी आशा.... चाँद-तारों को छूने की आशा.... दो दिनों की अच्छी बारिश के बाद कल मौसम बहुत अच्छा था. मम्मा भी घर पर थी तो कल शाम छत पर धमा-चौकड़ी मचाने में बिताया. मम्मा तो कहती हैं कि लवी को तो पकड़ना मुश्किल है, इतना तेज़ तेज़ दौड़ लगाती है. और कल अच्छी ठंडी ठंडी हवाएं भी चल रही थी तो दौड़ने में... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• लविज़ा | Laviza ●๋•

खेल-खेल में

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[02 Sep 2009 12:50 PM]

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