और मेरे चेहरे पर ये ख़ुशी आयी

दिल ये छोटा सा, छोटी सी आशा.... चाँद-तारों को छूने की आशा.... कल ऑफिस से लौटते वक़्त मम्मी पापा मेरे लिए रसगुल्ला लेकर आये थे. मुझे और मेरी मम्मा को तो रसगुल्ले खाना अच्छा लगता है पर मेरे पापा को मीठा खाना ज्यादा पसंद नहीं. . . पापा वहीँ बैठे कुछ पढ़ रहे थे. मैंने सोचा, थोडा सा उनको भी रसगुल्ले का स्वाद चखा दूँ,... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• लविज़ा | Laviza ●๋•

स्वाद

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[08 Sep 2009 19:35 PM]

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