नेह का दीपक मैं बारती
नेह का दीपक मैं बारती
प्रियतम तोहे पुकारती
आजा प्रिय…
दिवाली की शाम है छाई
पूजन पाठ मैं कर आई
आँगन चौखट मुंडेर पे,
फुलमालायें मैं संवारती
आजा प्रिय…
मेहंदी माहवर मैंने लगाये
रंगोली भी हैं सजाये,
काजल बिंदिया श्रींगार कर
रूप सुंदर अपना निख...
[पूरी पोस्ट]
कल्पना भारती
hindi poems
15
0
0
0
2
[15 Oct 2009 00:25 AM]



Shuffle







