अहमद "फ़राज़"

किस से कहें ? यूनुस भाई की एक पोस्ट जब पढ़ी थी तब ये ग़ज़ल याद आयी थी .... पढने की कोशिश की है ..... सुनना अच्छा लगे न लगे ....... ये ग़ज़ल ज़रूर पसंद आएगी ..... क्यों तबीयत कहीं ठहरती नहीं दोस्ती तो उदास करती नहीं हम हमेशा के सैर-ए-चश्म सही तुझ को देखें तो आँख भरती... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ मीत
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[14 Oct 2009 23:58 PM]

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