मौलिक चिंतन जाये भाड में!!
कल के मेरे आलेख पर ab inconvinienti ने टिपियाया:
हर मौलिक चीज़ भारत में गटर में फेंकने लायक समझी जाती है. विदेशियों की नक़ल उतार कर उनकी बुराइयाँ ज़रूर अपना लेते हैं पर उनकी अच्छी बातें पूरी तरह नज़रंदाज़ कर दी जाती हैं. इसका एक अच्छा उदाहरण है...
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Shastri JC Philip
विश्लेषण
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[14 Oct 2009 20:02 PM]



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