ऐसा क्यों होता है ?
कम नहीं था वह प्रेम जो दिया मैंने तुमको । माना कि तुम्हारी कुछ मजबूरियाँ थी । पर चाहती थी मैं भी सबकुछ बांटना तुम्हारा दुःख- सुख और तुम्हारा द्वन्द । मानते हो न तुम कि अधिकार था यह मेरा । पर तुम्हारा अहम और तुम्हारी मजबूरी । तुम्हारी मजबूरियों...
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चंदन कुमार झा
ज़िन्दगी
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[14 Oct 2009 16:26 PM]



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