पंकज सुबीर की कहानी- ‘जब दीप जले आना’

महावीर जब दीप जले आना’ -कहानी पंकज सुबीर वो लड़की आज भी उसी प्रकार खिड़की में नज़र आ रही है । दोनों तरफ खड़े ग़ुलमोहर के पेड़ों के ठीक बीच बनी हुई वह खिड़की दूर से देखने पर किसी चित्र की तरह नार आती है । उस मकान के जितने दूर से होकर वह रोज़ गुजरता [...]... [पूरी पोस्ट]
writer महावीर
views
15
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
10
[14 Oct 2009 13:41 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix