ये देश है बस अवकाशों का ....

Aaj Ki Aawaaz एक तरफ़ निजी क्षेत्र हैं जहाँ छुटि्टयों के लिए इन्तजार करना पड़ता है और दूसरी तरफ़ सरकारी कार्यालय हैं जो खुलने से ज्यादा बंद रहते हैं [खुलते भी हैं तो कितना काम करते हैं ] विदेशों की नक़ल कर के उन्होंने सप्ताह में दो दिन छुट्टी कर रखी है .............. [पूरी पोस्ट]
writer प्रकाश गोविन्द

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[19 May 2009 05:32 AM]

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