चला,,,,, मैं चला,,,,,,,,,,,
प्रिय दोस्तों ! मैं साल 2008 हूँ, चौंक गए न ? मैंने आप सभी के साथ काफी वक्त गुजारा तो सोचा कि मैंने इस दुनिया को किस तरह समझा, इस राज को आपके साथ बांटता चलूँ ! चलते-चलते क्यों न अपनों से बात कर ली जाए, जिस तरह दुनिया का नियम है जो आया है, उसे जाना है...
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प्रकाश गोविन्द
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[21 May 2009 03:03 AM]



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