भूल नहीं पाऊंगा

मेरा कुछ सामान... इक आहट पर जो, आँखें उठाई तो, देखा सामने वो है.. मैंने कहा ये वो नहीं, दिल ने कहा, ये वही है... कोई था उसके साथ, बिलकुल मेरे ही जैसा शायद वो मैं ही था.. बातें करते रहे देर तक, फिर इक सोफ़े जा बैठे, आ गए थे बहुत पास, अनजाने ही दोनों.. आँखें ब... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज
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[24 Sep 2009 10:13 AM]

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