ज़माना सुलग उठा (1)
गीत प्यार के सब लिखते हैं , हम प्यार कर बैठे तो , ज़माना सुलग उठा ... जीते हो अपनी जिंदगी हर रोज , एक दिन हमारी जी ली तो , ज़माना सुलग उठा ... कोई नहीं था बिना जाम के उस महफिल में , मैंने थोड़ी छलका दी तो , ज़माना सुलग उठा ......
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अम्बरीश अम्बुज
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[08 Oct 2009 02:52 AM]



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