पनाहों में तेरी हम, एक ठिकाना चाहते हैं...
चमन के फूल भी, तेरी तारीफ में खिलते हैं, मैं ही नही कहता ये, यहाँ सब लोग कहते हैं... तासीर इस हुस्न का है ऐसा, सब को है तसव्वुर तेरा, खोए तेरे ही ख़याल में, सब दिन रात रहते हैं... मैं ही नही कहता ये, ...
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अम्बरीश अम्बुज
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[14 Oct 2009 12:02 PM]



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