अक्सर सोचा करती हूँ

कल्पना की उड़ान ~~~wings of kalpana अक्सर सोचा करती हूँ क्यूँ दुनिया से डरती हूँ मन यादों का राह है इससे मैं गुजरती हूँ झील तेरे अहसासों का बनकर नाव उतरती हूँ तू एक दर्पण जिसमे मैं सजती संवरती हूँ तेरे ख्वाबो में आकर मैं हर रोज़ निखरती हूँ क्या तेरे दिल पर कभी बनकर चोट उभरती हूँ तू एक... [पूरी पोस्ट]
writer कल्पना भारती

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[30 Sep 2009 05:14 AM]

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