चीनी खाने और गन्ना बोकर, चूसने में अंतर है, नायपाल जी.

प्रखर दैनन्दिनी जे.एन. यू में मेरी पहली anchoring जबरदस्त सराही गयी, माँ शारदा को प्रणाम. प्रो. घोष की रसिकता पर मैंने यूं चुटकी ली : "..बदन होता है, बूढा, दिल की फितरत कब बदलती है, पुराना कूकर क्या सीटी बजाना छोड़ देता है....." (संपत सरल) खूब compliments मिले. मुझस... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीश पाठक 'प्रखर'
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[12 Oct 2009 14:53 PM]

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