उनके लिए

गठरी जिंदगी का अब मजा आने लगा है | देखकर उनको नशा छाने लगा है || फिर बहारों से चमन आबाद है , बाग़ में शायद कोई आने लगा है | दूर हूँ , मजबूरियां हैं इसलिए , बेवफा मुझको कहा जाने लगा है | रात भर बाँहों में रहते हैं मेरे , ख्वाब मेरा ये बिखर जाने लगा है | नज़... [पूरी पोस्ट]
writer GATHAREE

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[11 Oct 2009 03:35 AM]

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