अबोला दर्द
बेहद गर्मी थी, उफ! ये मई का महीना। हाल यह कि पेड़ का एक पत्ता भी नहीं हिल रहा। भरी दुपहरी में जब लोग पंखे कूलर में सो रहे थे तब अकेला बबलू कंचे खेलने में मशगूल था। उसके ललाट से पसीना रिसता हुआ गालों तक आ रहा था। एक दो तीन चार....... बबलू ने कंचे गिनना...
[पूरी पोस्ट]
Vimla Bhandari
4
0
0
0
0
[06 Oct 2009 13:48 PM]



Shuffle








