अंतरिम

Nitin Jalan क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ, किधर, किसको ढूँढना, चाहत, प्यास, होड़, जिद्द -लक्ष्य के अनेक रूप है पर मैंने एक नया रूप पाया -अलक्ष्य से लक्ष्य का लक्ष्य शून्य ! अंतरिम, मध्यांतर,... [पूरी पोस्ट]
writer mequitnever

Lifeज्ञानज़िन्दगी life

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[12 Oct 2009 02:56 AM]

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