रिंगटोन
बेटी का फोन था‘मुझे बचा लो मां’ का रिंगटोन थाकल फिर उन्होंनेमुझे मारा और दुत्कारातुम औरत होतुम्हारी औकात है -पैर की जूतीजूती ही बनी रहोखबरदार!जो सिर उठाने की कोशिश कीतो कुचल दूंगादेखा नहीं क्यातुमने कल का अखबारकल का नहीं तोपरसों का ही देख लोरोज छपती...
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Vimla Bhandari
kavita
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[10 Oct 2009 02:34 AM]



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