सूरज-चन्दा जैसे रौशन
सूरज-चन्दा जैसे रौशन हो जाएँ दिल सब के रौशन आप जो मेरे साथ चलेंगे हो जाएँगे रस्ते रौशन दिल को रौशन करने वाले मेरा घर भी कर दे रौशन खिड़की से कुछ जुगनू आकर कर जाते हैं कमरे रौशन इक दीपक के जल जाने से दीवारो-दर सारे रौशन चाँद सा चेहरा कब आएगा मेरे घर क...
[पूरी पोस्ट]
जतिन्दर परवाज़
poet
13
0
0
0
0
[06 Oct 2009 10:57 AM]



Shuffle








