पिया तेरी प्रीत जीवन संवार गयी
पिया तेरी प्रीत जीवन संवार गयी चमचमाती धूप घने कोहरे को छाँट गयी माथे अनुराग का टीका सजाए बैठी हूँ घूंघट मैं लाज का, आँखों में छिपाए बैठी हूँ हंसी तेरी, रूप मेरा कैसे निखार गयी पिया तेरी प्रीत जीवन संवार गयी हाथों में बंधन का रूप नहीं कंगन ये जिसका न...
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Deepa Pant
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[07 Oct 2009 06:02 AM]



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